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سورة القمر
बेशक हमने हर चीज़ एक मुक़र्रर अन्दाज़ से पैदा की है
और हमारा हुक्म तो बस ऑंख के झपकने की तरह एक बात होती है
और हम तुम्हारे हम मशरबो को हलाक कर चुके हैं तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
और अगर चे ये लोग जो कुछ कर चुके हैं (इनके) आमाल नामों में (दर्ज) है
(यानि) हर छोटा और बड़ा काम लिख दिया गया है
बेशक परहेज़गार लोग (बेहिश्त के) बाग़ों और नहरों में
(यानि) पसन्दीदा मक़ाम में हर तरह की कुदरत रखने वाले बादशाह की बारगाह में (मुक़र्रिब) होंगे